प्राकृतिक उपचार

Posted on 30-Apr-2015 02:36 PM




अखरोड़:
1.    इसकी छाल को मुँह में रख कर चबाने से दाँत साफ होते हैं।
2.    इसकी छिलकों की भस्म से मंजन करने से दाँत मजबूत होते हैं।
3.    दो अखरोट और तीन हरड़ की गुठली को जलाकर उसकी भस्म के साथ 4 नग काली मिर्च को पीस कर अंजन करने से नैत्रों की ज्योति बढ़ती है।
आम:
आम के फल में विटामिन ए और बी.सी. प्रचूर मात्रा में पाया जाता है।
1.    आम की गुठलियों के तेल को लगाने से बाल काले हो जाते हैं बालों का झड़ना भी बन्द हो जाता है।
2.    पके हुये आम को आग में दबा कर भून लें ठण्डा होने पर धीरे धीरे चूसने पर खांसी मिट जाती है।
अंगूर:
1.    8-10 नग मुनक्का 10 ग्राम मिश्री तथा 10 ग्राम मुलेठी पीसकर नस्य देने से पित्त एवं विकृति जन्य सिर का दर्द दूर होता है।
2.    बिना बीज की छोटी किशमिश मधुर, शीतल, वीर्य वर्धक रन्चीप्रद खट्टी तथा श्वांस, 
ज्वर, हृदय की पीड़ा, रक्त पित्त, क्षतक्षय, स्वर भेद, प्यास, बात, पित्त और मुख के कड़वेपन को दूर करती है।
अजवाईन:
1.    200 से 250 ग्राम अजवाइन गरम कर मलमल के कपड़े में बाँध ले, पोटली बनाकर तवे पर गर्म करके सूंघने से छींके आकर जुकाम का वेग कम हो जाता है।
2.    साफ कर के चूर्ण बनालें, 2 से 5 ग्राम की मात्रा से नस्वार की तरह सूंघने से जुकाम सर की पीड़ा तथा कफ का नासिका में रूक जाना आदि में लाभ देता है।
गाजर:
1.    गाजर को कहूकस कर दूध में उबाल कर खीर की तरह खाने से दिल को ताकत मिलती है। खून की कमी मिटती 
है।
2.    गाजर के रस में मिश्री मिलाकर चटनी सी बना लें। काली मिर्च बुरकालें चाटने से खाँसी दूर होती है। काम आराम से निकल जाता है।
आँवला: 
नेत्र रोग
1.    20-25 ग्राम आँवला को जो कूट कर दो घण्टे तक आधा किलो पानी में ओटा कर, उस जल को छान कर दिन में तीन बार आँखो में डालने से नेत्र रोगों में लाभ होता है।
2.    वमन: हिचकी तथ उल्टी में आँवले का 10-20 मिली लीटर रस 5-10 ग्राम मिश्री मिला कर देने से आराम होता है।


Leave a Comment:

Login to write comments.