नीम से प्राकृतिक चिकित्सा

Posted on 14-May-2015 02:27 PM




प्रकृति के आधार स्तम्भ पेड़ मनुष्य के जीवन को जीवन प्रदान करते हैं, तथा बीमारियों की अवस्था में आरोग्य का मंत्र भी बनते हैं। इसी संदर्भ में हम एक-एक वृक्ष के चिकित्सकीय गुणों का अध्ययन करेंगे।
नीम:
    नीम का वृक्ष चिकित्सकीय गुणों की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी जड़े, छाल, पत्तियाँ, टहनियाँ, गोंद, फूल फल व तेल का चिकित्सा की दृष्टि से सभी गुणकारी है। 
1.जड़े: इसकी जड़ों से खाट के पाये बनाए जाते हैं, गठिया, मोटापा व वात विकारों में इसका प्रयोग किया जाता है। इसका बारीक पाउडर लेप बनाकर त्वचा पर मंथन में इसका प्रयोग किया जाता है। 
2.छाल: छाल का प्रयोग खाल (त्वचा) के रोगों में जैसे- खाज, खुजली, फोड़ो, फुंसी, दाद, सफेद निशान, त्वचा का कालापन, आदि रोगों में घिसकर लगाने या पाउडर बनाकर लेप करें। छाल दांतों के रोगों में जैसे - पायरिया, कीड़ा लग जाना, दांत हिलना, मुँह से बदबू आना जैसे रोगों में लाभकारी है। मसूड़ों से पीप आने पर छाल के पाने से कुल्ले भी करवाये जाते हैं। 
3.पत्तियाँ: कोमल पत्तियों को चबाने से खून की वृद्धि होती है। किडनी, लीवर, आंतों की सफाई होती है। मधुमेह, रक्त विकार जैसे रोगों को दूर किया जाता है। पत्तियां खाने के व लगाने के दोनों ही काम में आती है। पत्तियों को उबालकर नहाने से खुजली, पसीने की दुर्गन्ध व खाज, जुऐं, लीक आदि रोगों में लाभकारी मानी गई है। दिन में भूखे पेट 5 से 10 तक ही कोमल पत्तियां चबाना चाहिए। गेहूँ, ज्वार आदि धान को कीड़ों से बचाने के लिए भी इनको गोदामों में रखा जाता है।
4.टहनियाँ: छोटी-छोटी टहनियाँ (दातुन) के रूप में काम आती है, जिनसे दांतों के रोग - जैसे दांतों में गंदगी जमना, कीड़े लग जाना, कमजोर होना तथा जीभ पर मैली परत का होना, दांतों की चमक का खो जाना, जैसे रोगों में अति उपयोगी है। 
5.गोंद: नीम के गोंद का चिकित्सकीय प्रयोग में आंतों में क्रियाशीलता बढ़ाना, मल निष्कासन की क्रिया को बढ़ाना व कागजों को कीड़ों से बचाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
6.फूल: नीम के फूल, मच्छरों को भगाने व इसका धुंआ खटमलों को भी भगा देता है। इसके फूलों की सब्जी पेट के कीड़ों को मार देतीे है तथा इसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम व चिकनी होती है।
7.फल: इसके फलों में नीम की निबोली आती है, जिसका उपयोग पाइल्स व मस्से जैसे रोगों को समूल नष्ट करता है। पेट के कीड़ों को मारकर पेट की सफाई करता है। नीम की पकी हुई निबोली खाने पर स्वाद में मिठी लगती है तथा पेट की कब्ज मिटाती है। कच्ची निबोली में दूध निकलता है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से उन महिलाओं को लाभ करती है तथा पेट की कब्ज मिटाती है। कच्ची निबोली में दूध निकलता है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से उन महिलाओं को लाभ करती है जिनके स्तनों में गांठ जैसी समस्याऐं हो रही है। कैंसर जैसे रोगों को दूर करता है।
8.नीम का तेल: नीम का तेल, खुजली, खाज, दाद, एग्जीमा व त्वचा के रूखेपन में, कील, मुहांसों में भी अति लाभकारी है।
9.नीम के पौधों से कभी कभी दूध जैसे पदार्थ निकलता है, जो वाम रोग, गठिया रोग, मूत्र रोगों में अति लाभकारी माना जाता है।
इस तरह नीम का पेड़ - लकड़ी के सामान बनाने से लेकर, खाने पीने तक में प्रयोग आता है। आप भी लगा सकते हैं एक नीम और पा सकते हैं, कई बीमारियों से मुक्ति।

 


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